सी-सैट विवादः उग्र हुआ छात्रों का प्रदर्शन, सरकार ने मांगा एक हफ्ता

Adil Raza Khan

upsc_protestयूपीएससी के सी-सैट विवाद को लेकर सरकार ने एक हफ्ते का वक्त मांगा है. राज्य सभा में इस मामले को लेकर हुई विशेष चर्चा का जवाब देते हुए कार्मिक राज्य मंत्री जीतेंद्र सिंह ने कहा कि एडमिट कार्ड जारी करने का फैसला यूपीएससी का है वो एक स्वतंत्र निकाय है. हालांकि उन्होंने छात्रों को भरोसा दिलाते हुए कहा कि सरकार एक हफ्ते के अंदर इस मामले का समाधान निकालने की कोशिश करेगी. उन्होंने कहा “हम भरोसा दिलाते हैं कि भाषाई आधार पर छात्रों के साथ किसी भी तरह का अन्याय नहीं किया जाए”

इससे पहले यूपीएससी के खिलाफ अपनी मांगों को लेकर लगातार प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने शुक्रवार को संसद का घेराव करने की कोशिश की. यूपीएससी के प्रवेश पत्र जारी करने से गुस्साए हज़ारों छात्रों ने संसद की तरफ कूच किया. जिसके बाद 150 से ज़्यादा प्रदर्शनकारी छात्रों को गिरफ्तार कर संसद मार्ग थाने ले जाया गया. गुरुवार देर रात भी छात्रों ने इस मामले को लेकर जमकर हंगामा किया था. आंदोलनकारी छात्रों ने राजधानी दिल्ली के मुखर्जी नगर से सटे इलाके वज़ीराबाद के नज़दीक हाईवे को जाम कर दिया.

छात्रों का गुस्सा उस वक्त भड़क उठा जब गुरुवार को यूपीएससी ने प्रारंभिक परीक्षा तयशुदा कार्यक्रम के तहत कराए जाने पर मुहर लगाते हुए प्रवेश पत्र जारी कर दिया. यूपीएससी के इस फैसले के बाद गुरुवार को देर शाम हज़ारों की तादाद में एकत्र छात्रों ने वज़ीराबाद के निकट दिल्ली-करनाल राजमार्ग को जाम कर दिया. छात्रों का गुस्सा इस क़दर भड़का कि उन्होंने एक पुलिस वैन और राज्य परिवहन की एक बस में आगज़नी की.

इस बीच पुलिस और उग्र छात्रों के बीच झड़प भी हुई. खबरों के मुताबिक झड़प के दौरान करीब 10 पुलिस वालों और कई छात्र घायल भी हुए हैं. जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने छात्रों पर जमकर लाठीचार्ज किया. उत्तरी दिल्ली के पुलिस कमिश्नर वर्मा के मुताबिक करीब 20 छात्रों को हिरासत में भी लिया गया है. गिरफ्तार छात्रों पर बलवा करने, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के तहत मामला दर्ज किया.

शुक्रवार को इस मुद्दे को लेकर संसद के दोनों सदनों में जमकर शोर-शराबा हुआ. इसा मामले को लेकर राज्य सभा की कार्यवाही स्थगित भी करनी पड़ी. विपक्षी सांसदों ने इस मामले पर सरकार से जवाब मांगा और प्रारंभिक परीक्षा में सी-सैट का पेपर हटाए जाने की मांग की.

राज्य सभा में इस मामले को अतिमहत्वपूर्ण मानते हुए शून्यकाल के दौरान अविलंब चर्चा कराई गई. जिसमें विपक्षी सांसदों समेत सत्तापक्ष के कई सांसदों ने छात्रों की मांगो को जायज़ ठहराया.

समाजवादी पार्टी के सांसद नरेश अग्रवाल ने सी-सैट हटाए जाने को लेकर छात्रों का समर्थन किया और कहा कि ये क्षेत्रीय भाषा के छात्रों के साथ अन्याय हो रहा है. उन्होंने कहा कि सरकार के प्रतिनिधि और लोक सभा सांसद मनोज तिवारी के आश्वासन के बाद लड़कों ने हड़ताल तोड़ी लेकिन अब उनकी मांगें नहीं मानी जा रहीं.

कांग्रेस सांसद सत्यव्रत चतुर्वेदी ने यूपीएससी के फैसले पर एतराज़ जताते हुए सरकार से इस मामले में तुरंत दखल देने की मांग की. तृणमूल कांग्रेस के सासंद डेरेक ओ ब्रायन ने चर्चा पर अपनी राय रखते हुए कहा कि ये मामला सिर्फ हिंदी-अंग्रेज़ी के भेदभाव क नहीं बल्कि सभी भारतीय भाषाओं से जुड़ा है.

वहीं राज्य सभा में सत्तापक्ष के सांसद मुख्तार अब्बास नक़वी ने छात्रों की मांग को जायज़ ठहराते हुए कहा कि मुझे उम्मीद है कि सरकार इस पर जल्द ठोस कदम उठाएगी.

उधर आंदोलन से जुड़े छात्रों ने सरकार पर आरोप लगाया है कि वो इस मामले पर छात्र हित की अनदेखी कर रही है. आंदोलन से जुड़े प्रदर्शनकारी छात्र नीलोत्पल ने बातचीत के दौरान बताया कि “सरकार के आश्वासन के बाद छात्रों ने आमरण अनशन तोड़ा. सरकार ने तब भरोसा दिलाया था कि इस मुद्दे का हल निकालेगी लेकिन अब हमारे साथ धोखा हो रहा है.”

गौरतलब है कि यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने वाले छात्र पिछले महीने से अपनी मांगों को लेकर आंदोलनरत हैं. इस दौरान छात्रों ने एक हफ्ते तक आमरण अनशन भी किया जिसे सरकारी हस्तक्षेप के बाद वापस लिया.

छात्रों की मांग है कि सिविल सेवा की प्रारंभिक परीक्षा के दूसरे पर्चे यानि सी-सैट को पाठ्यक्रम से हटाया जाए. छात्रों का मानना है कि 2011 के बाद, जब से नए पाठ्यक्रम लागू किए गए हैं, हिंदी और दूसरे भाषाई माध्यम के अलावा मानविकी विषय और ग्रामीण छात्रों को नुकसान उठाना पड़ रहा है. आंकड़ों के मुताबिक सी-सैट पैटर्न के बाद से सिविल सेवा में हिंदी, अन्य भारतीय भाषाओं, मानविकी विषय और ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाले प्रतिभागियों के चयन में अप्रत्याशित रूप से गिरावट दर्ज की गई है.