भारत ने रचा इतिहास, मंगल की कक्षा में स्थापित मंगलयान

RSTV Bureau

isro_scientistsइसरो के लिए बुधवार का दिन ऐतिहासिक रहा. अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में कीर्तिमान बनाते हुए भारत पहले ही प्रयास में मंगल ग्रह फतह करने वाला पहला देश बन गया.

भारत द्वारा भेजा गया मंगलयान पहले ही प्रयास में मंगल की कक्षा में स्थापित हो गया. बेंगलुरु के मार्स मिशन कमान्ड एंड कंट्रोल सेंटर में पीएम नरेंद्र मोदी भी इस ऐतिहासिक क्षण का गवाह बने. मिशन की कामयाबी के बाद भारत अमेरिका, रूस, यूरोप की श्रेणी में आ गया, जो अब तक मंगल ग्रह तक अपने यान भेजने में कामयाब हुए थे.

मंगलयान की कामयाबी पर देशवासियों और वैज्ञानिकों को बधाई देते हुए पीएम ने कहा आज मंगल को मां(MOM) मिल गई.

ये भी अंदेशा है कि कक्षा में स्थापित होने के कुछ ही घंटों में यान मंगल ग्रह की ली गई तस्वीरें भेजना शुरू कर देगा.

मंगल अभियान के इस निर्णायक चरण में पूरे 24 मिनटों तक यान के तरल इंजन को चलाया गया, जिसने इसे लाल ग्रह की कक्षा में स्थापित किया.

विभिन्न देशों द्वारा अब तक 51 अभियान इस ग्रह पर भेजे गए हैं जिनमें केवल 21 देशों को सफलता मिली थी.

कक्षा में स्थापित होने के बाद अब मार्स आर्बिटर मिशन अगले छह महीने तक लाल ग्रह की परिक्रमा करते हुए वहां से तस्वीरें और वैज्ञानिक आंकड़े भेजेगा.

भारत ने इस मिशन को कामयाब करने के लिए 450 करोड़ रुपये खर्च किये.

क्या करेगा मंगलयान ?

मंगलयान मंगल की धरती का अध्ययन कर वहां के बारे में जानकारी हासिल कर धरती पर भेजेगा. ये मंगल की धरती पर मीथेन गैस का भी पता लगायेगा.

कक्षा में स्थापित होने के बाद कुछ घंटों के भीतर ही ये वहां की तस्वीरें भेजना शुरु कर देगा.

भारत पहले ही प्रयास में ऐसा करने वाला दुनिया का इकलौता देश है.