इराक़ से लौटे 84 मज़दूर, सामने है जीवनयापन का संकट

indian_iraqइराक़ में फंसे आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के 84 कामगार सोमवार को सकुशल भारत लौट आए. सभी कामगारों को इराक़ी एयरवेज़ के विशेष विमान के ज़रिए दिल्ली लाया गया.

इन मज़दूरों में 38 आंध्र प्रदेश से जबकि 46 तेलंगाना के रहने वाले हैं. वापसी के बाद इन्हें दिल्ली स्थित आंध्र भवन में ठहराया गया और शाम को विशेष विमान के ज़रिए उन्हें हैदराबाद ले जाया जाएगा. आंध्र प्रदेश सरकार ने इसके लिए दो अधिकारियों को तैनात किया है ताकि मज़दूरों की घर तक सुरक्षित वापसी को सुनिश्चित किया जा सके.

स्वदेश लौटे ये कामगार, इराक़ के शहर नजफ़ में निर्माण कार्य में लगे थे. आंतरिक युद्ध से तबाह इराक़ से सही सलामत वापस लौटना इन कामगारों के लिए मौत के मुंह से बाहर निकलने जैसा रहा.

आंध्र प्रदेश के पश्चिमी गोदावरी ज़िले से ताल्लुक रखने वाले सूर्या का युद्धग्रस्त देश में रहने का अनुभव काफी डरावना रहा. नजफ़ में राज मिस्त्री का काम करनेवाले सूर्या बताते हैं कि “वो काफी ख़तरनाक मंज़र था, हम जिस जगह काम कर रहे थे वहां से महज़ 30 किलोमीटर की दूरी पर जंग छिड़ी थी और हमें लग रहा था कि कैसे हम अपने देश वापस लौटें और अपनी जान बचाएं”.

करीमनगर, तेलंगाना के निवासी गंगाराजम अपना दर्द बयां करते हुए कहते हैं कि उनके नियोक्ता ने उन्हें पिछले 3 महीने से मज़दूरी नहीं दी. युद्ध के हालात में उन्होंने इराक़ में भारतीय दूतावास के अधिकारियों से संपर्क किया और वे मदद के लिए आगे आए लेकिन ख़ून-पसीने की कमाई के बिना उन्हें ख़ाली हाथ लौटना पड़ा.

कमोबेश सभी मज़दूरों ने इसी तरह के हालात को बयान किया कि किस तरह विदेशों में कंपनियां उनके साथ व्यवहार करती हैं. न तो समय पर पगार मिलता है और ना ही आपात स्थिति में उनके सुरक्षित बच निकलने का कोई इंतज़ाम कंपनियों के द्वारा किया जाता है.

इराक़ में रोज़ी के सिलसिले में ये सभी मज़दूर 20 हज़ार से 30 हज़ार रुपये की मासिक तनख्वाह पर 6 महीनों से 2 साल तक के अनुबंध पर गए थे. इनमें से कई मज़दूरों ने कर्ज़ लेकर अपने विदेश जाने की रक़म अदा की थी.

इस तरह स्वदेश वापस लौटने पर मज़दूरों के सामने रोज़गार का संकट पैदा हो गया है जिसकी चिंता उन्हें सबसे ज़्यादा सता रही है.