कीर्ति आजाद ने निलंबन पर उठाए सवाल, खुद को बताया बेकसूर

RSTV Bureau

डीडीसीए विवाद की वजह से बीजेपी से निलंबित किए गए कीर्ति आजाद ने पार्टी को कारण बताओ नोटिस का जवाब दे दिया है। कीर्ति आजाद ने शुक्रवार को भेजे 3 पन्ने के जवाब में सभी आरोपों को निराधार बताया है। बीजेपी ने उन्हें नोटिस जारी कर पूछा था कि अनुशासनहीनता और पार्टी विरोधी गतिविधियों के लिए कि क्यों न आपको पार्टी से निकाल दिया जाए। बीजेपी ने कीर्ति आजाद को गुरुवार को नोटिस जारी कर 10 दिन के अंदर जवाब देने को कहा था।

FILE: New Delhi: BJP MP and former cricketer Kirti Azad with veteran cricketer Bishan Singh Bedi during a press conference regarding DDCA in New Delhi, December 20, 2015. Photo - PTI

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कीर्ति आजाद ने खुद को पार्टी का ईमानदार कार्यकर्ता बताया है और निलंबन को गलत करार दिया है। उन्होंने कहा कि वो डीडीसीए में भ्रष्टाचार का मामला नौ साल से उठा रहे हैं और बीजेपी ने एक बार भी उन्हें ऐसा करने से नहीं रोका। कीर्ति आजाद ने कहा कि इस मामले में उन्होंने कभी भी अरुण जेटली या पार्टी के किसी व्यक्ति का नाम नहीं लिया और पार्टी ने जेटली को डीडीसीए का प्रमुख नहीं बनाया था। डीडीसीए विवाद पर प्रेस कॉन्फ्रेंस करने के अपने फैसले को सही ठहराते हुए कीर्ति आजाद ने कहा कि उन्होंने हमेशा यही माना कि क्रिकेट के मामलों का पार्टी की गतिविधियों से कोई ताल्लुक नहीं है। कीर्ति आजाद ने जवाब में वित्त मंत्री पर फिर निशाना साधते हुए पार्टी से कहा कि अरुण जेटली पार्टी अनुशासन की आड़ नहीं ले सकते क्योंकि डीडीसीए के मामले का बीजेपी से कोई संबंध नहीं है।

आजाद ने जवाब में इस बात का भी जिक्र किया कि उन्होंने पार्टी अध्यक्ष अमित शाह से कहा था कि वो अरुण जेटली के साथ साझा बैठक में डीडीसीए में भ्रष्टाचार से जुड़े सभी दस्तावेज रखना चाहते हैं लेकिन इस बारे में कुछ प्रगति नहीं हुई। इसके बाद उन्हें लगा कि डीडीसीए में भ्रष्टाचार के मसले से बीजेपी का कोई लेना-देना नहीं है और जब वो पार्टी के किसी व्यक्ति का नाम नहीं ले रहे तो पार्टी के अनुशासन के दायरे में हैं।

कीर्ति आजाद ने कहा कि वो 1993 में पार्टी के साथ उस समय जुड़े जब पार्टी बुरे दौर से गुजर रही थी और पिछले 22 साल से वो एक वफादार सैनिक के तौर पर काम कर रहे हैं। बीजेपी पहले ही कह चुकी है कि 1999 से 2013 तक अरुण जेटली डीडीसीए के गैर कार्यकारी अध्यक्ष थे और संगठन की रोजमर्रा की गतिवधियों में वो शामिल नहीं थे। पार्टी ने दिल्ली सरकार की चेतन सांघी जांच रिपोर्ट को भी बचाव का आधार बनाया है जिसमें कहीं भी अरुण जेटली का जिक्र नहीं था। इस बीच दिल्ली सरकार की ओर से गठित जांच आयोग के अध्यक्ष पूर्व सॉलीसीटर जनरल गोपाल सुब्रमण्यम डीडीसीए विवाद की जांच कर रहे हैं। गोपाल सुब्रमण्यम ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल को चिट्ठी लिखकर आयोग की मदद के लिए 15 अधिकारियों के नाम मांगे हैं। उन्होंने आईबी, सीबीआई और दिल्ली पुलिस से पांच-पांच अधिकारियों के नाम भेजने का अनुरोध किया है। गोपाल सुब्रमण्यम ने दूसरी चिट्ठी मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को लिखी जिसमें भ्रष्टाचार निरोधक शाखा के पांच अधिकारियों के नाम बताने को कहा गया है।