हम थोपे नहीं गए, चुनकर आए हैंः तेज प्रताप

Vimal Chauhan

tej2यादव परिवार के सबसे युवा चेहरे और मैनपुरी से नवनिर्वाचित सपा सांसद तेज प्रताप सिंह यादव मुलायम सिंह के घर की तीसरी पीढ़ी हैं लेकिन परिवारवाद के सवाल को सिरे से खारिज करते हुए कहते हैं कि अगर वो सेवा के लिए राजनीति में हैं तो इसमें बुराई क्या है. उन्हें किसी ने लोगों पर थोपा नहीं है, जनता ने अपना मत देकर और विश्वास जताकर उन्हें चुना है. संसदीय इतिहास में पहली बार किसी एक परिवार की तीन पीढ़ियां संसद में एक साथ बैठेंगी, तो वहीं दूसरी ओर समाजवादी पार्टी बीते दशक में अपने सबसे कम संख्या बल के साथ संसद में है.

मैनपुरी में जीत के बाद तेज प्रताप से राज्यसभा टीवी वेबसाइट के लिए की गई बातचीत के कुछ अंश-

पहली बार सांसद चुने गए आप कैसा महसूस कर रहे हैं ?

चुनाव जीतने के बाद के अनुभव को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता है. बड़ा ही अविस्मरणीय अनुभव था. आज मैनपुरी का प्रतिनिधत्व करके बेहद गर्व महसूस करता हूं. जनता ने जो प्यार दिया और विश्वास किया उसपर खरा उतरना चाहता हूं.

कैसे जीते आप चुनाव लहर कमजोर पड़ी या आप मज़बूत रहे. आसान चुनाव तो नहीं था ?

नहीं बिल्कुल नहीं . . . चुनाव बिल्कुल आसान नहीं था. इस बारे में कई खबरें भी आईं. लेकिन अंतत: जीत नेता जी के क्षेत्र की जनता पर विश्वास और उनके द्वारा क्षेत्र में किए गए विकास की हुई. रही बात लहर की ना तो वो मैनपुरी में पहले थी ना अब है. हम तब भी 3 लाख से ज्यादा से जीते थे और अब भी जीते हैं.

जीत का श्रेय किसको, तेज प्रताप यादव को या नेताजी के नाम को ?

निश्चित तौर पर नेता जी का क्षेत्र की जनता के साथ जुड़ाव को, मैनपुरी की जनता को और मेरा क्षेत्र की जनता के साथ सीधे संवाद को. नेताजी के जादू से, उनके द्वारा किए गए मैनपुरी के चहुंमुखी विकास ने जीत की राह आसान की.

परिवार की पौध के सबसे ताज़ा पौधे हैं आप. तीन पीढ़ियों का यह परिवारवाद समाजवाद को निगल रहा है. विपक्ष इसी बात को लेकर निशाना साधता रहा है कि दक्षिण में करुणानिधि हैं तो उत्तर में मुलायाम सिंह यादव. आप इसे कैसे देखते हैं ?

सबसे पहले समाजवादी पार्टी का उदेश्य सदैव ही समाज की सेवा करना रहा है और रहेगा. और रही बात परिवारवाद की तो हमें किसी ने थोपा नहीं है, जनता ने चुन कर भेजा है. इस तरह के आरोप से वे लोग जनता के चुनाव पर सवाल उठाते हैं. अगर हम गलत होते तो जनता हमें कभी नहीं चुनती. जनता ने हमें इसलिए चुना क्योंकि नेता जी ने हमें सदैव लोगों के बीच में रहकर उनकी सेवा करने की सीख दी और हमने उसे माना. और. . . . डॉक्टर का बेटा डॉक्टर बन सकता है तो नेता का बेटा नेता क्यों नहीं ?

नेताजी की राजनीति में आप एक कठपुतली हैं या खुद को भविष्य के एक नेता के रूप में देखते हैं ?

नेता कभी भविष्य या वर्तमान का नहीं होता है. नेताजी जैसे जननायक से मैं अभी सीख रहा हूं ताकि लोगों की आंकक्षाओं को पूरा कर सकूं. हर एक नये दिन से कुछ ना कुछ नया सीखने को मिलता है. अभी मैं सिर्फ अपने संसदीय क्षेत्र के विकास पर ध्यान देना चाहता हूं.

संसद में जब आप होंगे, सपा की सीटें पिछले वर्षों में सबसे कम होंगी. कितना चुनौतीपूर्ण होगा ?

निश्चित तौर पर चुनौतीपूर्ण होगा. लेकिन नेताजी के नेतृत्व में हम लोगों की आवाज़ पूरज़ोर तरीके से उठायेंगे जैसा कि हम अतीत से करते आये हैं. संख्याबल से नेताजी के इरादों पर कोई फर्क नहीं पड़ता.

यादव परिवार की नई पीढ़ी को आप किस तरह से देखते हैं. आप किसके करीब हैं, नेताजी के या अखिलेश के ?

पूरा देश ही युवाओं को हर क्षेत्र में अग्रणी भूमिका में देखना चाहता है. ठीक उसी तरह समाज़वादी पार्टी में भी युवा मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के नेतृत्व में अहम भूमिका में निभा रहे हैं. रही बात करीब रहने की तो मैं सबसे छोटा हूं, हर किसी से सीखता हूं. मैं नेताजी द्वारा तैयार किए मार्ग पर अखिलेश जी के नेतृत्व में चल रहा हूं.

आप किसे अपना आदर्श मानते हैं. सूबे के लिए आपकी सोच और सपना क्या है. आप ऐसा क्या करेंगे जिसके लिए लोग आपमें भविष्य का नेताजी देखें ?

माननीय नेताजी को मैं अपना आदर्श मानता हूं. बचपन से ही उन्हीं को देखते हुए बहुत कुछ सीखते आया हूं. अभी मैं सिर्फ अपने संसदीय क्षेत्र पर ध्यान देना चाहता हूं. मैं नेता जी द्वारा किए गए विकास के सिलसिले को बनाए रखना चाहता हूं. राज्य सरकार द्वारा जनता के लिए अनेकों नई योजनाएं लाए जाने वाली हैं, मैं उन सब का लाभ अपनी क्षेत्र की जानता तक पहुंचना चाहता हूं.

राहुल, वरूण, अखिलेश, पंकज, जगन रेड्डी जैसे नामों के बीच आप क्या अपना वजूद कायम कर पायेंगे ?

निश्चित तौर पर मैं अपना वजूद कायम रख पाउंगा अपनी एक अलग पहचान बना पाऊंगा. हमारे साथ नेता जी जैसा टीचर है. उन से सीखकर निश्चित ही अपना मुकाम हासिल कर पांऊगा. नेता जी ने तो उस दौर में समाज़वादी पार्टी बनाई थी, जब राजनीतिक पलक पर कई बड़े नेताओं ने अपनी जगह बनाई हुई थी.

क्या मैनपुरी ही आगे भी आपकी कर्मभूमि रहेगी या फिर पार्टी और नेताजी के निर्देश के अनुसार आप अपनी सीट और क्षेत्र बदल सकते हैं ?

मैनपुरी की जनता से हमारे परिवार का सदैव गहरा लगाव रहा है और रहेगा. यहां की जनता और नेताजी के बीच एक अनोखा रिश्ता है. अभी पार्टी और नेताजी ने मुझे यहां की जनता की सेवा करने का दायित्व दिया है और मैं उसे निभाना चाहता हूं. बाकी पार्टी और नेताजी भविष्य में मेरे राजनीतिक भविष्य पर निर्णय लेंगे. और मैनपुरी की जनता से लगाव था, है और रहेगा.