क्या है मंगलयान का आगे का सफर..?

RSTV Bureau

mars1jpgभारत ने मंगलयान को पहले ही प्रयास में मंगल पर पहुंचाकर न सिर्फ इतिहास रचा बल्कि अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में नए आयामों की संभावनाओं का रास्ता भी खोल दिया है.

अब जबकि मंगलयान मंगल ग्रह की कक्षा में स्थापित हो गया है, लोगों के बीच यह सहज जिज्ञासा का विषय है कि आने वाले दिनों में मंगलयान क्या करेगा, कबतक वहां रहेगा और किस तरह की जानकारी हमें मंगलयान से मिल सकती है.

बुधवार सुबह आठ बजे (भारतीय समयानुसार) मंगलयान के मंगल ग्रह की कक्षा में स्थापित होने की ख़बर के बाद से ही अब जिज्ञासाओं के दरवाज़े इसके आगे के सफर पर टकटकी लगाए हुए हैं.

अच्छी ख़बर यह है कि पहले ही दिन से यानी आज दोपहर से ही मंगलयान मंगल ग्रह से संबंधित जानकारी भारतीय वैज्ञानिकों को भेजना शुरू कर देगा.

वैज्ञानिकों के मुताबिक, मंगल की कक्षा में मंगलयान लगभग 6 महीने तक रहेगा और इस दौरान वह लाल ग्रह के कई रहस्यों को बेपर्दा करेगा.

आज हमारे मन में मंगल को लेकर कई सवाल है जैसे कि क्या मंगल पर मीथेन गैस है? इस ग्रह के गर्भ में किस तरह के संसाधन छिपे हैं? क्या यहां जीवाणुओं का अस्तित्व है? मंगल पर जिंदगी की कितनी संभावनाएं हैं? इन तमाम सवालों की खोज करते हुए मंगलयान मंगल पर मीथेन गैस की संभावना को तलाशेगा.

50 किलोग्राम वजन वाला यह मंगलयान मंगल के वातावरण का करीब से अध्ययन कर वहां की सतह की तस्वीरें भेजेगा. अगर सबकुछ ठीक-ठाक रहा तो मंगल की कक्षा में स्थापित होने के कुछ घंटों बाद ही मंगलयान वहां की तस्वीरें भेजने लगेगा.

मंगलयान पर 360 डिग्री की तस्वीरें खींचने वाले विशेष कैमरे भी लगे हैं जिनकी मदद से यान मंगल की कई तरह की तस्वीरें खींच सकता है.

यान पर लगे विशेष थर्मल सेंसर मंगल ग्रह के ठंडे और गर्म भागों की पहचान करेंगे और मंगल के मौसम के बारे में जानकारी हासिल करने की कोशिश करेंगे.

पूर्ण रुप से भारतीय वैज्ञानिकों द्वारा तैयार मंगलयान अगर मंगल पर मीथेन गैस को तलाश पाता है तो इसे मंगल पर जीवन के पहले संकेत के तौर पर देखा जा सकता है.

अगर भारत का मार्स ऑर्बिटर मिशन(MOM) यानी मंगलयान अपने मिशन में पूरी तरह से कामयाब रहता है तो फिर अंतरिक्ष विज्ञान और तकनीक की दुनिया में भारत निश्चित तौर पर एक नया मुकाम हासिल कर लेगा.

श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर से 5 सितंबर 2013 को मंगलयान को PSLV के ज़रिए मंगल ग्रह पर भेजा गया था.

भारत से पहले रूस, अमरीका और यूरोप की ओर से मंगल को जानने की कोशिशें हुई हैं. भारत एशिया में मंगल तक पहुंचने वाला पहला देश है और विकासशील देशों की सूची में पहला नाम है जिसने मंगल पर दस्तक दी है.