केंद्रीय मंत्री गोपीनाथ मुंडे का निधन

RSTV Bureau

munde_death720केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री गोपीनाथ मुंडे का मंगलवार को दिल्ली में सड़क हादसे में निधन हो गया.

हादसे के बाद मुंडे को दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ट्रामा सेंटर ले जाया गया था जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.

मुंडे के पार्थिव शरीर को आज विशेष विमान से मुबंई ले जाया गया है. जिसके बाद बुधवार को बीड जिले स्थित उनके पैतृक गांव परली में उनका अंतिम संस्कार होगा.

गोपीनाथ मुंडे का पार्थिव शरीर अंतिम दर्शन के लिए भाजपा मुख्यालय ले जाया गया जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी, कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी समेत कई बड़े नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की.

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और पार्टी के वरिष्ठ नेता अटल बिहारी वाजपेयी ने भी मुंडे के देहांत पर श्रद्धांजलि और शोक व्यक्त किया.

महाराष्ट्र के बीड जिले के परली गांव में जन्मे मुंडे महाराष्ट्र में भाजपा का बड़ा चेहरा माने जाते थे. जनता और ज़मीन से जुड़ाव रखने के कारण लोगों में उनकी पहचान एक जनप्रिय नेता के तौर पर थी.

मुंडे का जन्म परली गांव में 12 दिसंबर 1949 में हुआ. किसान परिवार से आने वाले मुंडे को जनसरोकारों से जुड़ा नेता माने जाता था. अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ता के रूप में सियासी पारी शुरु करने वाले मुंडे आपातकाल विरोधी आंदोलन के भी गवाह रहे.

मुंडे का विवाह 1978 में भाजपा के दिवंगत नेता प्रमोद महाजन की बहन प्रज्ञा से हुआ. महाराष्ट्र की राजनीति में मुंडे-महाजन की जोड़ी को खासी लोकप्रियता मिली. दोनों ही नेताओं ने महाराष्ट्र में भाजपा की राजनीति जमाने में अहम भूमिका निभाई.

महाराष्ट्र विधानसभा में पांच बार विधायक रहे मुंडे 1992 से 1995 के बीच विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रहे. 1995 से 1999 की भाजपा-शिवसेना सरकार में मुंडे महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री भी रहे.

2009 में पहली बार बीड से ही लोक सभा सांसद रहे. 15वीं लोकसभा में भाजपा ने मुंडे को लोकसभा में उपनेता प्रतिपक्ष बनाया. 16वीं लोकसभा में महाराष्ट्र में भाजपा की कामयाबी में मुंडे ने बड़ी भूमिका अदा की.

किसानों के मुद्दे को उठाने वाले मुंडे की पहली पसंद ग्रामीण विकास मंत्रालय ही था. इसीलिए पार्टी की ओर से उन्हें ग्रामीण विकास मंत्री का पद दिया गया था.