द्विपक्षीय वार्ता के लिए माहौल बनाए पाक: पीएम मोदी

RSTV Bureau

pm-unBप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के अपने पहले भाषण में पड़ोसी देश पाकिस्तान पर सीधा निशाना साधा. मोदी के भाषण में जहां एक ओर पड़ोसी मुल्कों के साथ सहयोग और मित्रता की नीति का ज़िक्र था तो वहीं कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान को दो टूक जवाब भी.

संयुक्त राष्ट्र महासभा में पहली बार शिरकत करते हुए मोदी ने अपना भाषण हिंदी में दिया. महासभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि हम पाकिस्तान से मित्रता की पहल करते हैं. हम पाकिस्तान के साथ शांतिपूर्ण महौल में द्विपक्षीय वार्ता के हक़ में हैं लेकिन पाकिस्तान का भी दायित्व है कि दोतरफ़ा बातचीत के लिए माहौल बनाए.

कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान को करारा जवाब देते हुए पीएम ने कहा “कश्मीर मुद्दे को इस मंच पर उठाने से समाधान निकलेगा या नहीं इस पर कईयों को शक है”.

पीएम ने आतंकवाद को विश्व के लिए एक बड़ी समस्या बताते हुए कहा कि सभी देश आतंकवाद से जूझ रहे हैं. पश्चिम एशिया में आतंकवाद बढ़ रहा है. भारत चार दशकों से आतंकवाद से जूझ रहा है. आतंकवाद से लड़ने के लिए सबकी भागीदारी ज़रूरी है.

प्रधानमंत्री ने आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान का नाम लिए बिना ही कहा कि कुछ देश आतंकवाद को बढ़ावा दे रहे हैं. वे गुड टेररिज़म और बैड टेररिज़म की बात करते हैं. ऐसे हालात में तो आतंकवाद से लड़ने की हमारी प्रतिबद्धता पर ही सवाल खड़े होते हैं.

अंतराष्ट्रीय एकजुटता पर बल देते हुए पीएम ने कहा कि संयुक्त बातचीत के बावजूद हम सब टुकड़े में बंट जाते हैं. जी-8 और जी-20 जैसे देशों के समूहों पर कटाक्ष करते हुए पीएम ने कहा कि यूएन जैसा मंच होने के बावजूद भी हम लगातार जी समूह क्यों बनाते जाते हैं. हमें ‘जी वन’ से आगे बढ़कर ‘जी आल’ बनाने पर बल देना चाहिए.

मौजूदा समय को विश्व के लिए बदलाव का वक्त बताते हुए पीएम ने कहा कि हमें बदलाव की शुरुआत संयुक्त राष्ट्र से करनी होगी. संयुक्त राष्ट्र परिषद में सुधार लाना होगा इसे और लोकतांत्रिक बनाना होगा. इसके साथ ही उन्होंने यूएन में नए विचारों को शामिल किए जाने पर जोर दिया.

वैश्विक विकास में सबकी भागीदारी पर बल देते हुए पीएम ने कहा कि विकसित देशों को फंडिंग और टेक्नॉलोजी को विकासशील देशों के साथ साझा करना चाहिए. जिस गति से ट्विटर, फेसबुक और सेलफोंस का विस्तार हुआ, उसी गति से विकास का भी विस्तार हो सकता है. हमें अपने विकास के लिए दूसरों को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए.

इसके अलावा पीएम ने साफ-सफाई, बिजली की कमी, पीने के पानी की कमी, विश्व शांति, ग़रीबी जैसे मुद्दों को उठाते हुए कहा कि आज 1.1 बिलियन लोगों को पीने का शुद्ध पानी उपलब्ध नहीं है.

प्रधानमंत्री ने योग पर बल देते हुए कहा कि भारत में प्रकृति के प्रति आदर, अध्यात्म का अंग है. योग व्यायाम नहीं है, बल्कि पुरातन और अमूल्य देन है. योग खुद से और दुनिया से जुड़ने का साधन बताते हुए पीएम ने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की ज़रूरत पर भी रोशनी डाली.

वसुधैव कुटुंबकम को अपनी परंपरा बताते हुए पीएम ने कहा कि हम लोग दुनिया को एक परिवार की तरह देखते हैं, भारत सदा से ही दूसरों की आवाज़ उठाता आया है.