एक शख़्स जिनके प्राण खलनायकी में बसते थे

Abhishek Mishra

pran‘इस इलाके में नए आए हो बरखुरदार, वर्ना यहां शेर खान को कौन नहीं जानता’ या फ़िल्म ‘शीश महल’ में उनका एक डायलॉग- ‘मैं भी पुराना चिड़ीमार हूं और पर कतरना अच्छी तरह से जानता हूं….’ रोबदार आवाज़ में ‘बरखुरदार’ कहने वाले या ‘तेरा बाप राका’ कहने वाले का वो खास अंदाज भला कौन नहीं पहचानेगा.

यहां बात हो रही है बॉलीवुड के उस शख़्स की जिनके प्राण खलनायकी में बसते थे. आज हम उसी प्राण को याद कर रहे हैं उनकी 95वीं वर्षगांठ पर. बेहद दमदार और रोबदार आवाज़ के मालिक प्राण यानि श्री प्राण कृष्ण सिकंद जी ने अपने अभिनय से न जाने कितनी फ़िल्मों में प्राण डाले. वे एक ऐसी शख़्सियत थे जिन्होंने अपनी कड़क आवाज, रौबदार भाव और दमदार अभिनय के बल पर खलनायकी को एक नई पहचान दी.

प्राण साहब पर्दे पर बुरे आदमी का किरदार करते हुए कितने आक्रामक और कमोबेश प्राणघातक लगते हैं यह किसी से छिपा नहीं है. वे उस जमाने के कलाकार थे जब कलाकारों के सिर पर इमेज चढ़कर बोलती थी. इतना भी कहा और सुना जाता है कि 1960 और 1970 के दशक में फिल्मों में प्राण का खलनायक के रोल का असर लोगों की रियल लाइफ में इतना था कि किसी ने अपने बच्चे का नाम प्राण नहीं रखा था.

प्राण द्वारा निभाए गए खलनायकों के किरदार के चलते ही लोग उन्हें सड़कों पर गालियां देने से नहीं चूकते थे. दर्शक इस बात की छान-बीन करने लगे कि वास्तविक ज़िदगीं में प्राण क्या हैं. दर्शक को प्राण हमेशा एक बुरे आदमी का पर्याय नजर आते थे. यह उनके करियर का टर्निंग प्वाइंट था.

‘उपकार’ के मंगल चचा और ‘जंजीर’ के शेरखान में अपने अभिनय से एक बेमिसाल शख़्सियत की पहचान दिलवाई तो ‘हाफ टिकट’ में किशोर कुमार के साथ वह कॉमेडी करते हुए भी नजर आए. हिंदी सिनेमा के लिए 60 और 70 का दशक प्राण का था, यदि यह कहें तो अतिशयोक्ति नहीं होगी.

प्राण ने अपने अभिनय से समाज के हर किरदार को जिया जिन्हें जीना सच में अपने आप में महानता है. प्राण की शख्सियत एक ऐसे महान अभिनेता की रही जिनके चेहरे पर हमेशा भावनाओं का तूफान और आंखों में किरदार का चरित्र नजर आता था जो अपने हर किरदार को निभाते हुए यह अहसास करा जाता है कि उनके बिना इस किरदार की कोई पहचान नहीं हैं.

प्राण को तीन बार फ़िल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का पुरस्कार मिला. 1997 में उन्हें फ़िल्मफेयर लाइफ टाइम अचीवमेंट खिताब से भी नवाजा गया.

प्राण को हिन्दी सिनेमा में उनके योगदान के लिए 2001 में भारत सरकार ने पद्म भूषण और दादा साहेब फाल्के सम्मान से सम्मानित किया जा चुका है.