विधानसभा चुनावः दांव पर दिग्गजों की प्रतिष्ठा

Anugrah Mishra

imgमहाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा के नतीजे रविवार को आएंगे. ऐसे में दोनों ही राज्यों में अलग-अलग राजनीतिक दलों के दिग्गज नेताओं की प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई है. आम चुनाव के बाद किसी भी राज्य में ये पहला विधानसभा चुनाव है इस लिहाज से चुनावों के नतीजे देश में आगे की राजनीति का रुख तय कर सकते हैं.

महाराष्ट्र में इस बार का चुनाव पहले चुनावों से कहीं ज्यादा रोचक नज़र आ रहा है. दो दशक पुराना भाजपा-शिवसेना गठबंधन टूटने के बाद चुनाव में बहुकोणीय मुकाबला देखने को मिला. इसके अलावा सत्ताधारी कांग्रेस और एनसीपी में पड़ी दरार ने मौजूदा चुनाव को रोचक मोड़ पर ला खड़ा किया है.

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चौहान कराड-दक्षिण से कांग्रेस के उम्मीदवार हैं. कराड सीट कांग्रेस पार्टी की पारंपरिक सीट मानी जाती है, यहां से लंबे समय से कांग्रेसी विधायक जीतते आए हैं. पूर्व मुख्यमंत्री चौहान के मुकाबले  बीजेपी ने इस सीट पर अतुल भोंसले को टिकट दिया है.

महाराष्ट्र सरकार में मुख्यमंत्री और मंत्री रहे कांग्रेसी नेता नरायण राणे कुडाल विधानसभा सीट से अपनी किस्मत आज़मा रहे हैं. राणे कुडाल विधानसभा से लगातार छह बार विधायक रह चुके हैं. 2005 में कांग्रेस में शामिल होने से पहले राणे तीन बार शिवसेना की तरफ से इसी सीट से विधायक रहे.

भाजपा की ओर से राज्य में सबसे बड़ा नाम प्रदेश भाजपा अध्यक्ष देवेंद्र फड़नवीस का है. भाजपा ने देवेंद्र को नागपुर दक्षिण-पश्चिम सीट से अपना उम्मीदवार बनाया है.

पूर्व कैबिनेट मंत्री और दिवंगत भाजपा नेता गोपीनाथ मुंडे की बेटी पंकजा मुंडे परली सीट से भाजपा उम्मीदवार हैं. पंकजा के खिलाफ कांग्रेस ने अपना उम्मीदवार नहीं उतारा है जबकि एनसीपी ने पंकजा के चचेरे भाई धनंजय मुंडे को पार्टी का टिकट दिया है. परली से पिछला चुनाव पंकजा मुंडे ने जीता था.

एनसीपी की ओर से शरद पवार के भतीजे और महाराष्ट्र के पूर्व उप-मुख्यमंत्री अजित पवार बारामती सीट से चुनाव मैदान में हैं. पवार परिवार की पारंपरिक सीट बारामती से अजित पवार चार बार विधायक रह चुके हैं. अजित से पहले इसी सीट से एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने छह बार जीत हासिल की थी.

एनसीपी के नेता और महाराष्ट्र के पूर्व उप-मुख्यमंत्री छगन भुजबल येवला सीट से चुनावी मैदान में हैं. भाजपा ने छगन भुजबल के खिलाफ शिवाजी मांकर को पार्टी का टिकट दिया है. येवला से पिछले चुनाव में छगन भुजबल की जीत हुई थी.

गोरेगांव सीट से शिवसेना उम्मीदवार सुभाष देसाई पार्टी का भरोसेमंद चेहरा माने जाते हैं. गोरेगांव से लगातार पांच बार शिवसेना जीतती आई है. सुभाष देसाई दो बार लगातार इसी सीट से विधायक रहे हैं. भाजपा ने देसाई के मुकाबले विद्या ठाकुर को अपना उम्मीदवार बनाया है.

हरियाणा

हरियाणा में कांग्रेस, भाजपा, इनेलो और हजकां के बीच कड़ा मुकाबला है. वहीं गोपाल कांडा की हरियाणा लोकहित पार्टी और विनोद शर्मा की जनचेतना पार्टी ने भी पहली बार अपनी किस्मत आज़माई है.

मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा गढ़ी संपला किलोई सीट से किसम्त आज़मा रहे हैं. लगातार दो बार हरियाणा के मुख्यमंत्री हुड्डा कांग्रेस पार्टी का भरोसेमंद चेहरा माने जाते हैं. हुड्डा चार बार सांसद रह चुके हैं और किलोई सीट से लगातार दो बार विधायक भी चुने गए. भाजपा ने इस सीट से कांग्रेस से बगावत कर भाजपा में शामिल हुए धर्मवीर हुड्डा को टिकट दिया है.

जिंदल समूह की मुखिया सावित्री जिंदल हिसार सीट से कांग्रेस उम्मीदवार हैं. सावित्री जिंदल दो बार हिसार से विधायक रह चुकी हैं और पिछली सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रहीं हैं. हिसार से सावित्री जिंदल के पति और उद्योगपति ओ पी जिंदल (दिवंगत) भी विधायक रह चुके हैं.

भाजपा नेता और अंबाला कैंट से उम्मीदवार अनिल विज, नारनौंद से भाजपा उम्मीदवार कैप्टन अभिमन्यु की हार-जीत पर सबकी नज़रें टिकी हुई हैं. भाजपा की ओर से राज्य भर में कैप्टन अभिमन्यु ने रैलियां की हैं.

हिसार से लोकसभा सांसद और पूर्व मुख्यमंत्री ओ पी चौटाला के पोते दुष्यंत चौटाला उचाना कलां से इनेलो उम्मीदवार हैं. लोकसभा चुनाव में जीत दर्ज करने के बाद भी दुष्यंत विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं.

हरियाणा जनहित कांग्रेस के नेता कुलदीप बिश्नोई आदमपुर सीट से अपनी किस्मत आज़मा रहे हैं. कुलदीप की पत्नी रेणुका बिश्नोई हांसी सीट से हजकां उम्मीदवार हैं. राज्य में हजकां और जनचेतना पार्टी मिलकर चुनाव लड़ा.

कांग्रेस छोड़ कर नई पार्टी बनाने वाले हरियाणा लोकहित पार्टी के नेता गोपाल कांडा सिरसा सीट से मैदान में हैं. हरियाणा सरकार में मंत्री रहे कांडा एअर होस्टेज गीतिका शर्मा आत्महत्या मामले को लेकर विवादों में रहे.

हरियाणा जनचेतना पार्टी के नेता विनोद शर्मा अंबाला सिटी से उम्मीदवार है जबकि उनकी पत्नी शक्ति शर्मा को कालका सीट से चुनावी मैदान में उतारा गया है. जनचेतना पार्टी राज्य में पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ रही है.

दोनों ही राज्यों में किसी भी पार्टी ने अभी मुख्यमंत्री पद के लिए किसी का नाम आगे नहीं किया है. महाराष्ट्र और हरियाणा में किस पार्टी की सरकार बनेगी और कौन अगला मुख्यमंत्री होगा, ये 19 अक्टूबर के नतीजों के बाद ही साफ हो पाएगा.