पत्रकारिता में इतिहास बोध और राजेन्द्र माथुर

Rajesh Badal

भारतीय हिंदी पत्रकारिता इन दिनों संक्रमण काल का सामना कर रही है . अनेक विधाएँ धीरे धीरे दम तोड़ती नज़र आ रही हैं .सामाजिक नज़रिए से उनकी आवश्यकता है

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अँधेरे बन्द कमरे में रौशनदान

Rajesh Badal

पच्चीस बरस पहले की भारतीय पत्रकारिता. टाइम्स ऑफ इंडिया समूह की लोकप्रिय साहू अशोक जैन-रमेश जैन की जोड़ी हाशिए पर जा रही थी. नई पीढ़ी को मैनेजमेंट

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कितने लोग इस भगत सिंह को जानते हैं

Rajesh Badal

सोलह-सत्रह बरस के भगत सिंह की भाषा पर आप क्या टिप्पणी करेंगे? इतनी सरल और कमाल के संप्रेषण वाली भाषा भगत सिंह ने बानवे-तिरानवे साल पहले लिखी थी.

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सरकारी विदेश दौरे और मीडिया

Dilip Khan
विश्व कप फुटबॉल कवर करने अगर कोई मीडिया संस्थान दो-तीन रिपोर्टर भेज सकता है तो इराक़-सीरिया कवर करने एक अदना रिपोर्टर क्यों नहीं भेज सकता? अगर

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