अभिव्यक्ति बनाम अराजकता

Gurdeep Singh Sappal

सुनते आये थे कि झूठ के पाँव नहीं होते. पर आजकल उसके पंख होते हैं. बिजली की गति से, समय-काल-स्थान की सीमाओं को लाँघ कर, झूठ साइबर स्पेस के कोने

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