भारतीय बंधकों की हत्या की बात ग़लतः विदेश मंत्री

RSTV Bureau

sushmaविदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने शुक्रवार को संसद में दिए अपने बयान में कहा कि ईराक में बंधक 39 भारतीयों की हत्या की ख़बर गलत है. विदेश मंत्री ने अन्य संसद सदस्यों से भी बंधक भारतीय के लिए मृत शब्द का प्रयोग न करने की अपील की.

गुरुवार को एक हिन्दी न्यूज चैनल ने खुलासा कर बताया था कि ईराक के मौसुल में 39 भारतीय बंधकों को जून 2014 में हत्या कर दी गई है. आतंकी संगठन आईएसआईएस की कैद में 40 भारतीय बंधक थे जिनमें से एक हरजीत कैद से भाग निकला, बाकी लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी.

चैनल के मुताबकि हरजीत ने दो बांग्लादेशी बंधकों को बताया कि उस के सामने 39 भारतीयों की गोली मारकर हत्या कर दी गई और वो किसी तरह अपनी जान बचाकर वहां से भागने में सफल रहा. चैनल ने उन्हीं दो बांग्लादेशी नागरिक शफी और हसन से बातचीत कर ये खुलासा किया. मीडिया में ख़बर आने के बाद से विपक्ष लगातार सरकार से इस मुद्दे जवाब मांग रहा था.

सुषमा स्वराज ने कहा कि सरकार ईराक में मौजूद अपने सूत्रों से लगातार संपर्क में है. सरकार के सूत्रों के मुताबिक ईराक में बंधक भारतीय जिंदा हैं और सुरक्षित हैं. सदन में दिए बयान में विदेश मंत्री ने कहा कि सरकार अपुष्ट खबरों पर विश्वास नहीं कर सकती. सुषमा ने कहा कि मीडिया में ऐसी खबरें लगातार आती रही हैं, इन खबरों की विश्वसनीयता पर सवाल है.

सुषमा स्वराज के बयान से पहले कांग्रेस की ओर से राज्य सभा में आनंद शर्मा और प्रमोद तिवारी ने बंधकों के मुद्दे पर सरकार से सफाई मांगी. जेडीयू सांसद के सी त्यागी, सपा से रामगोपाल यादव और बसपा से मायावती ने भी इस मुद्दे पर विदेश मंत्री से जबाव मांगा.

विदेश मंत्री ने अपने बयान में कहा कि शफी और हसन की बातों पर यकीन नहीं किया जा सकता. सरकार अपने सूत्रों की ओर से दी गई जानकारी के आधार पर काम कर रही है. भारतीय बंधकों को वापस लाने के लिए सरकार हर मुमकिन कदम उठाने को तैयार है.